संता और बंता की दोस्ती हंसी की सबसे प्यारी दुकान है। कभी दोनों school की बातों में उलझते हैं, तो कभी bazaar में अजीब हिसाब लगाते हैं। अगर आप santa banta jokes in hindi ढूंढ रहे हैं, तो यह collection आपके लिए है। यहां 105 बिल्कुल नए चुटकुले हैं, जो school, bazaar, phone, safar और chai जैसी रोज़ की बातों पर बने हैं।
सारे jokes साफ और family friendly हैं। आप इन्हें दोस्तों की chat में, family group में और घर पर भी आराम से share कर सकते हैं। ये jokes सिर्फ मज़े के लिए हैं, किसी का मज़ाक उड़ाने के लिए नहीं। और हां, अगर आपको लंबे comedy collection पसंद हैं, तो हमारी Hindi Jokes category में और भी sections मिलेंगे।
इस collection के sections
- Quick Picks: 10 Best Santa Banta Jokes
- School Aur Padhai Wale Jokes
- Bazaar, Dukaan Aur Paise Wale Jokes
- Phone, Photo Aur Technology Jokes
- Safar, Gaadi Aur Rasta Jokes
- Chai, Khana Aur Mehman Wale Jokes
- WhatsApp Par Share Karne Wale Santa Banta Jokes
- Frequently Asked Questions
- More from LovelyJoke
Quick Picks: 10 Best Santa Banta Jokes
ये दस jokes संता बंता की रोज़ की छोटी बातों से हैं। कभी चाय की दुकान, कभी आईना और कभी एक छोटा सा फैसला, हर बात में दोनों की नोकझोंक हंसी बन जाती है। जो joke सबसे अच्छा लगे, उसे उसी समय अपने दोस्तों के group में भेज दीजिए।
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बंता: यार संता, तू हर बात में इतना शांत कैसे रहता है?
संता: क्योंकि मैं हर सवाल का जवाब घर जाकर सोचता हूं।
बंता: और फिर?
संता: घर जाकर सवाल ही भूल जाता हूं। शांति खुद आ जाती है।
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संता: बंता, मैंने कल से सुबह जल्दी उठने का पक्का फैसला किया है।
बंता: बहुत बढ़िया। शुरुआत कब से है?
संता: कल से। आज तो फैसला सुनाकर ही थक गया हूं।
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बंता: तू आईने के सामने खड़े होकर क्या बात कर रहा था?
संता: एक समझदार इंसान से सलाह ले रहा था।
बंता: मिली?
संता: वह भी मेरी ही बात से सहमत हो गया।
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संता: मेरी याददाश्त दिन पर दिन कमाल होती जा रही है।
बंता: कैसे?
संता: कल मैं अपना चश्मा ढूंढता रहा, और वह मेरी आंखों पर ही था। लगता है अब चश्मा भी खुद को छिपाना सीख गया है।
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बंता: तू इतना मुस्कुरा क्यों रहा है?
संता: आज मैंने अपना फोन घर पर छोड़ दिया।
बंता: तो खुशी किस बात की?
संता: पहली बार battery की चिंता फोन को होगी, मुझे नहीं।
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संता: बंता, डॉक्टर ने कहा है खाना धीरे धीरे चबाकर खाया करो।
बंता: तो अब क्या होगा?
संता: अब खाना एक घंटा चलेगा। मां को बता देना, रोटियां उसी हिसाब से बनाएं।
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बंता: तू छत पर क्यों चढ़ा है?
संता: नेटवर्क पकड़ने।
बंता: मिला?
संता: नेटवर्क तो नहीं मिला, पर पूरे मोहल्ले का नजारा मुफ्त में मिल गया।
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संता: मैंने अपनी नई कमीज पर इतना बड़ा बटन लगवाया है कि दूर से भी दिखे।
बंता: क्यों?
संता: ताकि फोटो में कम से कम एक चीज तो साफ नजर आए।
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बंता: तू इतनी देर से खाली कागज को क्यों देख रहा है?
संता: अपना भविष्य पढ़ रहा हूं।
बंता: क्या लिखा है?
संता: अभी खाली है, मतलब मौके बहुत हैं।
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संता: बंता, आज मैं बहुत बड़ा आदमी बनने वाला हूं।
बंता: कैसे?
संता: दर्जी ने मेरी कमीज का नाप जो बढ़ा दिया है।
School Aur Padhai Wale Jokes
संता बंता की school वाली बातें हर किसी को अपने बचपन की याद दिलाती हैं। Class की शरारत, teacher के सवाल और exam के दिनों की घबराहट, इन सब पर दोनों की बातचीत हमेशा मजेदार बनती है। और भी तरह तरह के comedy sections एक ही जगह पढ़ने हों, तो हमारा funny jokes in Hindi वाला बड़ा collection भी जरूर देखिए।
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शिक्षक: संता, तुम class में हमेशा खिड़की की तरफ क्यों देखते हो?
संता: सर, किताब के जवाब अंदर हैं और छुट्टी बाहर। दोनों पर नजर रखनी पड़ती है।
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बंता: संता, exam की तैयारी कहां तक पहुंची?
संता: किताब का पहला पन्ना पढ़ लिया है।
बंता: बस?
संता: उसमें लिखा था, सफलता मेहनत से मिलती है। सोचा पहले यह सीख पक्की कर लूं।
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शिक्षक: बंता, बताओ ताजमहल कहां है?
बंता: सर, आगरा में।
शिक्षक: और तुमने copy में क्या लिखा है?
बंता: वही सर, बस साथ में यह भी लिख दिया कि देखने जरूर जाना।
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संता: बंता, मैंने आज class में इतना अच्छा जवाब दिया कि सर खुश हो गए।
बंता: क्या जवाब दिया?
संता: सर ने पूछा कि सवाल किसे समझ नहीं आया। मैंने सबसे पहले हाथ उठाया।
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शिक्षक: संता, तुम्हारी copy में हर सवाल के आगे जवाब वाली जगह खाली क्यों है?
संता: सर, आपने कहा था मन की बात लिखो। मेरे मन ने हर सवाल पर यही कहा, रहने दो।
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बंता: संता, library में इतनी देर क्या कर रहे थे?
संता: एक किताब ढूंढ रहा था, नींद कैसे लाएं।
बंता: मिली?
संता: नहीं, पर उसे ढूंढते ढूंढते नींद खुद आ गई।
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शिक्षक: बंता, नक्शे में उत्तर दिशा कहां होती है?
बंता: सर, ऊपर की तरफ।
शिक्षक: और असली जिंदगी में?
बंता: सर, वहां तो मां की आवाज जिधर से आए, वही दिशा सबसे सही होती है।
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संता: बंता, कल मेरी छुट्टी बिल्कुल पक्की है।
बंता: कैसे?
संता: कल रविवार है। मैंने हफ्ते भर पहले से इसका plan बना रखा था।
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शिक्षक: संता, तुमने निबंध में सिर्फ दो लाइनें क्यों लिखीं?
संता: सर, विषय था, कम बोलने के फायदे। मैंने लिखकर नहीं, करके दिखा दिया।
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बंता: संता, तुम्हें गणित से इतना डर क्यों लगता है?
संता: क्योंकि हर सवाल में कोई न कोई कुछ बेचकर चला जाता है, और हिसाब मुझसे पूछा जाता है।
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शिक्षक: बंता, तुम्हारी थाली में आठ पूरियां हैं और संता दो खा ले, तो क्या होगा?
बंता: सर, संता को पहले यह साबित करना होगा कि पूरियां मेरी ही थीं। हिसाब उसके बाद होगा।
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संता: बंता, PT वाले सर रोज हमें दौड़ने को क्यों कहते हैं?
बंता: सेहत के लिए।
संता: फिर खुद कुर्सी पर क्यों बैठे रहते हैं?
बंता: वह सेहत का निरीक्षण करते हैं।
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शिक्षक: संता, पृथ्वी गोल है, इसका कोई सबूत दो।
संता: सर, छुट्टी का दिन इतनी जल्दी घूमकर वापस चला जाता है, और सोमवार भी घूमकर आ ही जाता है।
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बंता: संता, तुम्हारी नई copy इतनी साफ कैसे है?
संता: क्योंकि इसमें अभी कुछ लिखा ही नहीं।
बंता: और कल?
संता: कल से यह भी बाकी copies जैसी हो जाएगी।
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शिक्षक: बंता, इतिहास में तुम्हें सबसे अच्छा क्या लगता है?
बंता: सर, यह कि वह बीत चुका है। अब सिर्फ पढ़ना बाकी है।
शिक्षक: और पढ़ने में?
बंता: सर, वही इसका सबसे कठिन हिस्सा है।
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संता: बंता, आज मैंने teacher की बहुत मदद की।
बंता: कैसे?
संता: उन्होंने कहा, जिसे जवाब न आता हो वह चुप रहे। मैंने पूरी घंटी चुप रहकर उनका साथ दिया।
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शिक्षक: संता, यह नक्शा तुमने उल्टा क्यों बनाया है?
संता: सर, ताकि जब मैं कहीं खो जाऊं, तो रास्ता मुझे सीधा लगे।
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बंता: संता, result वाले दिन तुम इतने शांत क्यों रहते हो?
संता: क्योंकि marks तो पहले ही तय हो चुके होते हैं। घबराने से सिर्फ भूख बढ़ती है।
Bazaar, Dukaan Aur Paise Wale Jokes
Bazaar में संता बंता की जोड़ी सबसे ज्यादा रंग दिखाती है। मोलभाव की बहस, दुकानदार के सवाल और पैसों का छोटा छोटा हिसाब, हर खरीदारी इनके लिए एक नई comedy बन जाती है। नीचे के jokes उन्हीं जानी पहचानी दुकानों और गलियों से आए हैं।
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संता: भाई, यह तरबूज मीठा है या नहीं, कैसे पता चलेगा?
दुकानदार: काटकर देख लीजिए।
संता: और मीठा न निकला तो?
दुकानदार: तो अगला काटेंगे।
संता: तो पूरी दुकान काटने के बाद ही पता चलेगा कि मैं तो खरबूजा लेने आया था।
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दुकानदार: साहब, यह घड़ी बहुत मजबूत है, गिरने से नहीं टूटती।
संता: तो गिराकर दिखाइए।
दुकानदार: और टूट गई तो?
संता: तो वही वाली नहीं लूंगा, दूसरी देना।
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बंता: संता, तुम मोलभाव में इतने तेज कैसे हो?
संता: मैं हमेशा आधी कीमत से शुरू करता हूं।
बंता: और दुकानदार?
संता: वह दोगुनी कीमत से शुरू करता है। बीच में दोनों की इज्जत बच जाती है।
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संता: भाई, आम कैसे दिए?
दुकानदार: दो सौ रुपये किलो।
संता: इतने महंगे? यह आम हैं या परीक्षा के नंबर?
दुकानदार: खाकर देखिए साहब, दोनों में मिठास जरूरी होती है।
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बंता: संता, तुमने किराने की list में हर चीज दो दो बार क्यों लिखी है?
संता: एक असली जरूरत के लिए, दूसरी मां के सवालों के लिए। पूछेंगी इतना क्यों लाए, तो कहूंगा list में था।
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संता: भाई, यह बैग कितने का है?
दुकानदार: पांच सौ का, पर आपके लिए चार सौ।
संता: और मेरे इस दोस्त के लिए?
दुकानदार: उसे भी चार सौ।
संता: तो मेरा खास होना सिर्फ शब्दों में था।
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बंता: संता, तुम हर खरीदारी में मुफ्त वाली चीज क्यों पूछते हो?
संता: क्योंकि जो चीज मुफ्त मिलती है, वही घर तक मुस्कुराकर जाती है। बाकी सब बिल के साथ गंभीर हो जाती हैं।
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संता: भाई, यह कमीज धोने पर सिकुड़ेगी तो नहीं?
दुकानदार: बिल्कुल नहीं साहब।
संता: और मैं बढ़ गया तो?
दुकानदार: साहब, उस बात की गारंटी तो भगवान भी नहीं देता।
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बंता: संता, तुमने सब्जी वाले को इतनी देर घूरकर क्यों देखा?
संता: मैं टमाटरों से पूछ रहा था, आज भाव आसमान पर क्यों हैं?
बंता: क्या बोले?
संता: कुछ नहीं, सब लाल होकर चुप रहे।
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दुकानदार: साहब, यह तेल बालों को लंबा करता है।
संता: मेरे बाल तो वैसे भी लंबे हैं।
दुकानदार: तो यह वाला लीजिए, यह चमक के लिए है।
संता: आप सामान बेच रहे हैं या मेरी कमी निकालकर उसका इलाज दे रहे हैं?
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बंता: संता, तुमने उधार की डायरी क्यों बनाई है?
संता: ताकि याद रहे, किस किस को याद दिलाना है।
बंता: और जो तुमने मुझसे लिया था?
संता: वह पन्ना डायरी की इज्जत के लिए खाली छोड़ा है।
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संता: भाई, यह आईना कितने का है?
दुकानदार: तीन सौ का।
संता: इतना महंगा? इसमें तो मैं ही दिख रहा हूं, कोई film star नहीं।
दुकानदार: साहब, वही तो इस आईने की सच्चाई है।
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बंता: संता, मेला घूमने चलें?
संता: जेब में पैसे कितने हैं?
बंता: सौ रुपये।
संता: ठीक है, आधे मेले का plan बनाते हैं। झूले दूर से देखेंगे, वह बिल्कुल मुफ्त है।
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दुकानदार: साहब, यह छाता बारिश में बिल्कुल नहीं भीगता।
संता: छाता भीगता कहां है, भीगता तो मैं हूं।
दुकानदार: मतलब आप नहीं भीगेंगे।
संता: तो यही बात लिखकर दीजिए। पिछली बार सिर्फ मतलब ही भीग गया था।
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संता: बंता, मैंने आज सोने का भाव पूछा।
बंता: खरीदने का plan है क्या?
संता: नहीं, बस यह पक्का करना था कि मेरी बचत अभी उस list में नहीं आई।
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बंता: संता, तुम फल वाले से इतनी दोस्ती क्यों रखते हो?
संता: वह हर बार ऊपर से एक अंगूर खाने को देता है।
बंता: बस एक अंगूर?
संता: दोस्ती छोटी चीजों से शुरू होती है, और मीठी भी।
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संता: भाई, चावल कौन सा अच्छा है?
दुकानदार: यह वाला, सब यही लेते हैं।
संता: और जो सब नहीं लेते?
दुकानदार: वह सस्ता वाला है।
संता: तो वही दीजिए। मैं भीड़ से अलग सोचने वालों में हूं, खासकर कीमत के मामले में।
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दुकानदार: साहब, यह कुर्सी बहुत मजबूत है, हाथी भी बैठ जाए तो कुछ न हो।
संता: घर में हाथी तो है नहीं, पर मेहमान जरूर हैं। वही test इसके लिए काफी होगा।

Phone, Photo Aur Technology Jokes
आज की दुनिया में संता बंता की नोकझोंक फोन के बिना अधूरी है। Battery की चिंता, selfie का अंदाज़ और charger की तलाश, हर छोटी बात इनके लिए हंसी का सामान बन जाती है। नीचे के jokes उसी नई दुनिया की पुरानी दोस्ती की कहानी हैं।
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बंता: संता, तुम्हारा फोन इतना धीरे क्यों चलता है?
संता: वह मेरी तरह सोचकर जवाब देता है।
बंता: मतलब?
संता: सवाल आज पूछो, जवाब कल पक्का मिलेगा।
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संता: बंता, मैंने फोन में ऐसी setting कर दी है कि अब कोई मुझे परेशान नहीं कर सकता।
बंता: कौन सी setting?
संता: फोन बंद। सबसे पुरानी और सबसे कामयाब setting।
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बंता: संता, तुम selfie में हमेशा आंखें बंद क्यों रखते हो?
संता: ताकि फोटो देखकर लगे कि मैं उस पल को महसूस कर रहा था।
बंता: और असल में?
संता: असल में धूप बहुत तेज थी।
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संता: बंता, मेरा फोन कह रहा है कि storage भर गया है।
बंता: कुछ delete कर दो।
संता: किया था। अब फोन कह रहा है कि यादें भी तो रखनी थीं।
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बंता: संता, तुम group में सबको good morning क्यों भेजा?
संता: ताकि सबको पता चल जाए कि मैं उठ गया हूं।
बंता: और फिर?
संता: फिर मैं दोबारा सो गया। जानकारी देना मेरा काम था।
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संता: बंता, मेरा charger हर जगह क्यों घूमता रहता है?
बंता: तुम रखते कहां हो?
संता: जहां जरूरत हो वहां। बस जरूरत रोज अपनी जगह बदल देती है।
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बंता: संता, तुम video call में हमेशा छत क्यों दिखाते हो?
संता: कैमरा नीचे रखता हूं, इसलिए।
बंता: क्यों?
संता: ताकि बातचीत में मेरा चेहरा थका हुआ न लगे। छत हमेशा fresh रहती है।
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संता: बंता, मैंने अपने फोन को एक नाम दिया है, साथी।
बंता: क्यों?
संता: क्योंकि battery खत्म होते ही सबसे पहले यही साथ छोड़ता है, बिल्कुल पुराने साथियों की तरह।
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संता: बंता, तुम online सामान इतना क्यों मंगाते हो?
संता: दुकान जाने में समय लगता है।
बंता: और मंगाने में?
संता: उसमें इंतजार लगता है, पर इंतजार घर बैठकर होता है।
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संता: बंता, मेरा password हर site पर अलग है।
बंता: याद कैसे रहते हैं?
संता: नहीं रहते। मैं हर बार नया बना लेता हूं। मेरी सुरक्षा का सबसे बड़ा राज़ मेरी भूल है।
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संता: बंता, तुमने अपनी फोटो पर इतने filter क्यों लगाए हैं?
संता: एक मेरी नींद छिपाता है, एक थकान और एक कल की चिंता।
बंता: और असली चेहरा?
संता: वह सबसे नीचे है, और सबसे सच्चा भी।
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संता: बंता, मेरा फोन रात को खुद ही चमक उठता है।
बंता: कोई notification होगा।
संता: वही तो। फोन को भी लगता है कि मैं उसकी तरह रात भर जाग सकता हूं।
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बंता: संता, तुम message का जवाब इतनी देर से क्यों देते हो?
संता: मैं हर शब्द सोचकर लिखता हूं।
बंता: तुमने सिर्फ OK लिखा है।
संता: उसी एक शब्द पर सबसे ज्यादा सोच लगी थी।
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संता: बंता, मैंने smart TV लिया है।
बंता: क्या खास है उसमें?
संता: वह भी मेरी तरह आधे सवालों पर चुप रहता है, और remote ढूंढने में बिल्कुल मदद नहीं करता।
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बंता: संता, तुम्हारा फोन बार बार hang क्यों हो जाता है?
संता: उसमें तुम्हारे भेजे हुए सारे शुभकामना वाले message भरे हैं। फोन भावनाओं से भर गया है।
Safar, Gaadi Aur Rasta Jokes
सफर में संता बंता की बातें और भी खुल जाती हैं। Bus की खिड़की वाली सीट, train का इंतजार और गाड़ी की धीमी रफ्तार, हर सफर इनके लिए एक नई कहानी बन जाता है। नीचे के jokes उन्हीं रास्तों से आए हैं, जहां मंजिल से ज्यादा मजा बातों में है।
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बंता: संता, तुम bus में खिड़की वाली सीट के लिए इतनी जल्दी क्यों पहुंच जाते हो?
संता: ताकि रास्ते भर बाहर देख सकूं।
बंता: और करते क्या हो?
संता: सो जाता हूं। पर सीट मेरी होती है, यही सुकून है।
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संता: कंडक्टर साहब, यह bus सीधे जाएगी या घूमकर?
कंडक्टर: घूमकर जाएगी।
संता: ठीक है, मुझे घूमने का शौक है, पर किराया सीधे वाला ही लीजिएगा।
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बंता: संता, तुम्हारी गाड़ी इतनी धीरे क्यों चलती है?
संता: ताकि रास्ता पूरा दिखता रहे।
बंता: और मंजिल?
संता: वह तो कहीं भागी नहीं जा रही।
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संता: बंता, मैंने आज पेट्रोल बचा लिया।
बंता: कैसे?
संता: गाड़ी घर पर खड़ी रखी और पूरे दिन उसकी तारीफ की। चलने से ज्यादा, रुकने में वह चमकती है।
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बंता: संता, तुम रास्ता क्यों भूल जाते हो?
संता: मैं भूलता नहीं हूं, रास्ते खुद मुड़ जाते हैं।
बंता: कल भी ऐसा ही हुआ था।
संता: देखो, रास्ते भी आदत से मजबूर होते हैं।
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संता: भाई, बाजार तक छोड़ दोगे?
रिक्शावाला: बैठिए साहब।
संता: पैसे पहले तय कर लेते हैं। बाद में रास्ता लंबा हो जाता है और दोस्ती छोटी।
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बंता: संता, train की खिड़की से तुम हर station पर क्यों झांकते हो?
संता: यह देखने के लिए कि कहीं मेरा station पीछे तो नहीं रह गया।
बंता: और अगर रह गया हो तो?
संता: तो अगले station पर उतरकर किस्मत को धन्यवाद दूंगा कि सफर थोड़ा लंबा मिला।
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बंता: संता, तुम साइकिल की घंटी क्यों नहीं बजाते?
संता: बजाता हूं, पर लोग हटते नहीं।
बंता: तो फिर?
संता: अब मैं खुद हट जाता हूं। कम से कम घंटी की इज्जत बच जाती है।
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संता: बंता, हवाई जहाज में खिड़की वाली सीट मिली तो मैं बहुत खुश था।
बंता: फिर?
संता: पूरे रास्ते सिर्फ बादल दिखे। लगा जैसे किसी ने सफेद पर्दा टांग दिया हो।
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बंता: संता, तुम पैदल चलने को इतना अच्छा क्यों कहते हो?
संता: क्योंकि इसमें न किराया लगता है, न पेट्रोल। बस जूते घिसते हैं।
बंता: वह भी तो खर्चा है।
संता: है, पर वह धीरे धीरे पता चलता है।
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संता: भाई, मीटर से चलोगे या मन से?
टैक्सी ड्राइवर: मीटर से चलूंगा।
संता: अच्छा है। मन से चलते तो भावनाएं भी बिल में जुड़ जातीं।
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बंता: संता, तुम्हारी गाड़ी का horn इतना तेज क्यों है?
संता: ताकि सोया हुआ रास्ता जाग जाए।
बंता: और लोग?
संता: वह तो पहले से जागे हुए हैं, बस मानते नहीं।
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संता: बंता, कल मैं गलत bus में चढ़ गया था।
बंता: फिर क्या हुआ?
संता: पूरे रास्ते नए मोहल्ले देखे। गलतियां भी कभी कभी अच्छा tour करा देती हैं।
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संता: बंता, सफर में सबसे जरूरी चीज क्या होती है?
बंता: टिकट?
संता: धैर्य। टिकट खो जाए तो नया बन जाता है, धैर्य खो जाए तो पूरा सफर भारी हो जाता है।
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बंता: संता, तुमने अपनी गाड़ी को नाम क्यों दिया है?
संता: ताकि जब वह बीच रास्ते में रुके, तो मैं उसे प्यार से समझा सकूं, गुस्से से नहीं।
Chai, Khana Aur Mehman Wale Jokes
चाय की दुकान और खाने की मेज पर संता बंता की दोस्ती सबसे मीठी लगती है। मां के हाथ का खाना, शादी की दावत और मेहमानों की आवभगत, हर बात इनके लिए हंसी का बहाना है। नीचे के jokes उन्हीं स्वाद भरे पलों से आए हैं।
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बंता: संता, तुम चाय में हमेशा दो बिस्कुट क्यों डुबोते हो?
संता: एक खाने के लिए, दूसरा चाय की गहराई नापने के लिए।
बंता: और जो डूब जाता है?
संता: वह गहराई का सबूत बन जाता है।
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संता: मां, आज खाना बहुत अच्छा बना है।
मां: सच? रोज तो शिकायत करते हो।
संता: आज मेहमान आने वाले हैं, मैं पहले से practice कर रहा हूं।
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बंता: संता, तुम्हारे घर मेहमान आए तो तुम इतने खुश क्यों थे?
संता: क्योंकि मेहमानों के लिए बनी मिठाई मुझे भी मिलती है।
बंता: और अगर मेहमान न आएं तो?
संता: तो मिठाई का सारा भार अकेले उठाना पड़ता है।
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संता: बंता, मैंने खाना बनाना सीख लिया है।
बंता: क्या बनाया?
संता: चाय। और चाय के साथ यह बहाना कि आज हल्का खाना सेहत के लिए अच्छा है।
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बंता: संता, तुम ठंडी चाय क्यों पी रहे हो?
संता: गर्म चाय पीने में समय लगता है, और मुझे जल्दी है।
बंता: कहां जाने की जल्दी है?
संता: कहीं नहीं, बस जल्दी की पुरानी आदत है।
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संता: भाई, इस दाल में नमक थोड़ा कम है।
ढाबे वाला: तो नमक डाल दूं?
संता: नहीं, दाल थोड़ी और डाल दो। हिसाब बराबर हो जाएगा।
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बंता: संता, तुम शादी के खाने में सबसे पहले मीठा क्यों खाते हो?
संता: ताकि अगर बाकी खाना पसंद न आए, तो शुरुआत अच्छी रहे।
बंता: और पसंद आ जाए तो?
संता: तो अंत में फिर मीठा खाऊंगा। जीत दोनों तरफ है।
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संता: मां, तुम पराठे इतने गोल कैसे बनाती हो?
मां: अभ्यास से।
संता: और मेरे बनाए हुए नक्शे जैसे क्यों बनते हैं?
मां: क्योंकि तुम खाना नहीं, भूगोल बना रहे होते हो।
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बंता: संता, तुम्हें खाना खाते ही नींद क्यों आने लगती है?
संता: पेट भरते ही दिमाग छुट्टी की अर्जी लगा देता है।
बंता: और वह अर्जी?
संता: हमेशा मंजूर हो जाती है। यही एक दफ्तर है जहां कभी देर नहीं होती।
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संता: बंता, आज मैंने सिर्फ एक समोसा खाया।
बंता: बहुत संयम रखा तुमने।
संता: दुकान बंद हो गई थी, वरना संयम की परीक्षा और लंबी चलती।
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बंता: संता, मेहमानों के सामने तुम इतना कम क्यों खाते हो?
संता: ताकि वे समझें कि मैं ऐसा ही हूं।
बंता: और उनके जाने के बाद?
संता: तब मैं अपनी असली पहचान में लौट आता हूं।
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संता: भाई, चाय में इलायची डाली है क्या?
चायवाला: नहीं साहब।
संता: तो यह खुशबू कहां से आई?
चायवाला: बगल वाली दुकान से।
संता: तो बिल भी आधा वहीं से ले लेना।
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बंता: संता, तुम्हें खीर इतनी पसंद क्यों है?
संता: क्योंकि वह धीरे धीरे बनती है और जल्दी खत्म हो जाती है। बिल्कुल छुट्टी की तरह।
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संता: मां, आज सब्जी में इतना तेल क्यों है?
मां: ताकि रोटी आसानी से निगली जाए।
संता: और मैं जो रोज हर काम में फिसल जाता हूं, उसका कारण भी शायद यही है।
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बंता: संता, तुम हर त्योहार पर मिठाई का डिब्बा सबसे पहले क्यों खोलते हो?
संता: ताकि पक्का हो जाए कि त्योहार असली है, या सिर्फ तारीख आई है।
WhatsApp Par Share Karne Wale Santa Banta Jokes
ये jokes छोटे हैं, ताकि आप इन्हें copy करके सीधे दोस्तों के group में भेज सकें। छोटा joke सबसे जल्दी पढ़ा जाता है और सबसे जल्दी आगे बढ़ता है। और भी छोटे चुटकुले चाहिए तो short jokes in Hindi वाला collection देखिए।
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बंता: संता, तुमने मेरा कल वाला message आज क्यों पढ़ा?
संता: ताकि जवाब सोचने का पूरा समय मिले।
बंता: और जवाब क्या है?
संता: वही पुराना, ठीक है। ज्यादा सोचने से शब्द छोटे हो जाते हैं।
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संता: बंता, मैंने आज group में सुबह का संदेश नहीं भेजा।
बंता: क्यों?
संता: सोचा, आज सूरज को खुद सबको बता लेने दूं। रोज मैं ही क्यों बताऊं।
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बंता: संता, तुम हर फोटो पर सिर्फ thumbs up वाला निशान क्यों भेजते हो?
संता: क्योंकि वह हर बात पर फिट बैठता है।
बंता: और दिल वाला निशान?
संता: वह मैं असली मुलाकात के लिए बचाकर रखता हूं।
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संता: बंता, मेरा status सबने देखा, पर जवाब किसी ने नहीं दिया।
बंता: status पर जवाब कम ही मिलता है।
संता: तो अगली बार status में सवाल लिखूंगा। पूरा परीक्षा जैसा माहौल बनेगा।
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बंता: संता, तुम voice message इतना लंबा क्यों भेजते हो?
संता: ताकि सुनने वाला मेरी पूरी भावना समझे।
बंता: हम तो बीच में ही रोक देते हैं।
संता: वही तो, भावना आधी रह जाती है। फिर मिलकर पूछनी पड़ती है।
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संता: बंता, मैंने अपना profile photo बदल दिया है।
बंता: क्यों?
संता: पुराने photo में मैं बहुत गंभीर था। लोग डरकर सिर्फ काम की बात करते थे।
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बंता: संता, तुम online होकर भी offline जैसा व्यवहार क्यों करते हो?
संता: क्योंकि मेरी हाजिरी फोन लगाता है, मन नहीं।
बंता: और मन कहां होता है?
संता: चाय की दुकान पर।
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संता: बंता, group में इतने सारे फूलों वाले photo क्यों आते हैं?
बंता: वह शुभकामनाएं हैं।
संता: इतने फूल रोज आते हैं कि फोन में बगीचा बन गया है, बस खुशबू नहीं आती।
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बंता: संता, तुमने मेरा भेजा हुआ joke आगे क्यों नहीं भेजा?
संता: पहले खुद हंसना जरूरी समझा।
बंता: तो हंसे?
संता: अभी तक कोशिश जारी है।
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संता: बंता, मैं हर message के अंत में मुस्कान वाला निशान क्यों लगाता हूं, जानते हो?
बंता: क्यों?
संता: ताकि अगर बात थोड़ी भारी हो जाए, तो उसका अंत हल्का लगे।
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संता: बंता, तुम्हारा last seen हमेशा कल का क्यों दिखता है?
संता: क्योंकि मैं आज में जीता हूं, और फोन कल में अटका रहता है।
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बंता: संता, मैंने सारे पुराने chat मिटा दिए हैं।
बंता: यादें भी चली गई होंगी।
संता: यादें मन में हैं। फोन में जगह चाहिए थी, नई यादों के स्वागत के लिए।
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संता: बंता, तुम birthday पर सिर्फ एक line की बधाई क्यों लिखते हो?
संता: क्योंकि जिसे बधाई देनी है, वह जानता है कि मैं कितना खुश हूं।
बंता: और केक के लिए?
संता: केक के लिए मैं हमेशा लंबा समय निकालता हूं।
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संता: बंता, आज group में सब बहुत चुप हैं।
बंता: शायद सब व्यस्त होंगे।
संता: तो एक joke भेजता हूं। चुप्पी भी टूटेगी, और पता भी चल जाएगा कि कौन कौन सिर्फ पढ़ने के लिए आता है।
Jokes Share Karne Ke Asaan Tips
अच्छा joke सही समय पर भेजा जाए तो और मज़ेदार लगता है। किसी दोस्त का mood हल्का करना हो तो Quick Picks में से एक joke भेजिए। Family group के लिए school और chai वाले jokes सबसे safe रहते हैं, क्योंकि वे साफ हैं और किसी एक इंसान पर निशाना नहीं साधते।
Santa Banta Jokes in Hindi: How to Share Them on WhatsApp
किसी भी joke को दबाकर copy कीजिए और chat में paste कर दीजिए। लंबा collection एक साथ भेजने के बजाय एक एक joke भेजिए, ताकि पढ़ने वाले हर joke का मज़ा अलग से ले सकें। और हां, किसी असली इंसान की असली परेशानी का मज़ाक कभी मत बनाइए। संता और बंता सिर्फ कहानी के प्यारे characters हैं, ये jokes उन्हीं की काल्पनिक नोकझोंक पर बने हैं।
बहुत कम लोग जानते हैं कि संता और बंता के characters मशहूर लेखक खुशवंत सिंह ने बनाए थे, और बाद में एक comedy jodi ने इन्हें TV पर घर घर पहुंचाया। अगर आप इस jodi की असली कहानी पढ़ना चाहें, तो Wikipedia पर Santa Banta jodi के बारे में जान सकते हैं। हमारे ये jokes उन्हीं प्यारे characters की रोज़ की दोस्ती को नए अंदाज़ में आगे बढ़ाते हैं।
Frequently Asked Questions
1. Are these santa banta jokes in hindi safe to share in family groups and friends chats?
Yes. All 105 jokes in this collection are clean and friendly. There is no rude word and no personal attack, so you can share them in family groups, friends chats and school groups without worry.
2. Kya main ye jokes WhatsApp par share kar sakta hoon?
Haan, bilkul. Har joke alag block mein likha hai, taaki aap use asani se copy karke kisi bhi group ya chat mein bhej saken. WhatsApp section ke jokes khaas taur par chhote rakhe gaye hain.
3. Kya ye jokes kisi asli insaan ya kisi samudaay ka mazak udate hain?
Nahi. Santa aur Banta sirf kahani ke kaalpanik characters hain. Ye jokes roz ki haalaton par bane hain, jaise school, bazaar, safar aur chai ki dukaan. Koi joke kisi asli insaan, dharm ya samudaay ke baare mein nahi hai, is liye sab inhein bina jhijhak padh aur share kar sakte hain.
4. Is collection mein kitne jokes hain?
Is collection mein kul 105 jokes hain. Quick Picks mein 10, school section mein 18, bazaar section mein 18, phone section mein 15, safar section mein 15, chai aur khana section mein 15 aur WhatsApp section mein 14 jokes hain.
5. Santa Banta ke alawa aur dost wale jokes kahan padh sakte hain?
Aap LovelyJoke ke desi jokes in Hindi wale collection aur funny jokes in Hindi wale bade collection mein aur bhi doston wali comedy padh sakte hain. Dono ke links is article mein diye gaye hain.
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Editorial note: This collection is written by the LovelyJoke team for fun and sharing. The jokes are light situational comedy about two fictional friends, not about any real person or community.